
बिलासपुर,,, या तो फंड का टोटा है या सरकारी अमला काम नही कर रहा। आखिर वजह क्या है कि शनिवार को आंधी तूफान के दौरान धराशायी हुए पेड़ की डगाल और सड़क तक बिखरी झाड़ियां नगरीय प्रशासन मंत्री और एसएसपी बंगले के सामने से आज तक नही हटाई जा सकी। बिजलीं, पानी सब ठप है, लोगो मे आक्रोश पनप रहा है।

आप खुद इन तस्वीरों में देखिए कैसे नगरीय प्रशासन मंत्री और एसएसपी बंगले के सामने 6 दिन पूर्व आंधी तूफान के दौरान टूटकर गिरी पेड़ की डगाल और सड़क तक उलझी पड़ी झाड़ियां है। इसके चलते सड़क के बीचोबीच डिवाइडर और फुटपाथ के बीच आधी सड़क तक पेड़ की झाड़ियां पड़ी है, राहगीरों को बच बचाकर यहाँ से गुजरना पड़ रहा।
2 माह से बोर ठप होने के कारण लिंगियाडीह के नागरिकों को तपती दुपहरी में लिंगियाडीह से विकास भवन और कलेक्ट्रेट तक प्रदर्शन कर ज्ञापन सौपना पड़ा।

पार्षद और नागरिक बता रहे किं कैसे उन्हें भीषण गर्मी में जलसंकट का सामना करना पड़ रहा पानी के लिए हाहाकार मचा है।
ये तीसरी तस्वीर चाटीडीह के रपटा के ठीक सामने गली की है। आप खुद देखिये कैसे ये लड़का ठेले में लगभग दर्जन भर बाल्टी बर्तन लेकर यहां पानी लेने आया है और बता रहा कि चाटीडीह सब्जी मंडी के ठीक पहले मौर्य काम्प्लेक्स का बोर सूख गया है इसलिए रोज यहां से इसी तरह अपने घर के लिए पीने और निस्तार का पानी भरकर ले जाता है।
विद्युत व्यवस्था तो महीनों से चरमराई है, शनिवार की आंधी तूफान के बाद से तो शहर के ज्यादातर इलाको की विद्युत व्यवस्था और भरभरा गई है। वो भी तब जब सुशासन तिहार चल रहा स्थिति पूरे कुए में भंग घुलने जैसी है।
प्राइवेटाइजेशन से भी नही सुधरे हालात
दावा किया जा रहा था कि प्राइवेटाइजेशन के बाद व्यवस्था में सुधार आएगा, नगर निगम विद्युत व्यबस्था सब ठेके पर है, इन फर्मो को करोड़ो भुगतान किए जा रहे पर हकीकत ये है कि हालात दिनों- दिन और बदतर होतीं जा रही है। कुलमिलाकर निजीकरण से पब्लिक का भला होता नही दिख रहा। जरूरत इस बात की है कि ऐसे सुशासन खोजने के बजाय जनता द्वारा चुनी गई सरकार जनता के हित में काम करे।



