0 हार्ट अटैक्नॉर ब्रेनहेमरेज से अकस्मात हो रही मौतों के रोकने कारगर पहल
0 डीन प्रो मूर्ति ने कहा सिम्स को देश अग्रणी प्रशिक्षण संस्थान बनाने किया आव्हान



बिलासपुर। सिम्स में शनिवार को तीन दिवसीय बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) एवं एडवांस कार्डियक लाइफ सपोर्ट प्रशिक्षण कार्यशाला का समारोह पूर्वक समापन हुआ।


एनेस्थीसिया विभाग और मेडिकल एजुकेशन यूनिट द्वारा
15 मई से 17 मई तक आयोजित इस कार्यशाला का सिम्स के डीन डॉ रमणेश मूर्ति ने दीप प्रज्वलन कर शुभारम्भ किया था। 3 दिवसीय इस कार्यशाला में पोस्टग्रेजुएट छात्रों एवं युवा डॉक्टरों को आपातकालीन परिस्थिति में जीवनरक्षा के तकनीकी और नैतिक पहलुओं का प्रशिक्षण दिया गया। डीन डॉ. मूर्ति ने कहा कि “ऐसे प्रशिक्षण आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था की रीढ़ और प्रशिक्षित डॉक्टरों की उपस्थिति समाज के लिए सुरक्षा कवच है।उन्होंने सिम्स को देश का एक अग्रणी प्रशिक्षण संस्थान बनाने आव्हान किया।

राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षको ने दिया प्रशिक्षण
इस प्रशिक्षण में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से आए विशेषज्ञ डॉक्टरो ने विद्यार्थियों को बताया कि आजकल कार्डियेक अरेस्ट और ब्रेनस्ट्रोक से अकस्मात मौते हो रहा है, कैसे समय पर उन्हें आपातकालीन स्थिति में मदद कर उनकी प्राण रक्षा की जाए। प्रशिक्षकों में डॉ मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज (MAMC), नई दिल्ली के डॉ राकेश कुमार और डॉ. शक्ति दत्त शर्मा – सिम्स के एनेस्थीसिया विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति – अम्बिकापुर की एसोसिएट प्रोफेसर• डॉ. शिल्पा खन्ना और डॉ. आयुषी गुप्ता, अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर के इमरजेंसी मेडिसिन कंसल्टेंटडॉ. भट्टाचार्य , डॉ. विनय सोनी मौजूद रहे।
क्या होता है बीएलएस और एसीएलएस
बीएलएस (बेसिक लाइफ स्पोर्ट ) व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट जैसी आकस्मिक स्थितियों में त्वरित सीपीआर कृत्रिम श्वसन और प्राथमिक जीवनरक्षक तकनीकें सिखाता है। वही एसीएलएस(एडवांस्ड कार्डियेक लाइफ स्पोर्ट) एक उच्च स्तरीय प्रशिक्षण है, जिसमें कार्डियक मॉनिटरिंग, मेडिकेशन एडमिनिस्ट्रेशन, डिफिब्रिलेशन, एयरवे मैनेजमेंट जैसी जटिल विधियों का अभ्यास कराया गया ।
मरीजों की जान बचाने में होगा सीधा लाभ
सिम्स के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. लखन सिंह ने कहा कि यह प्रशिक्षण सिम्स अस्पताल के आपात सेवाओं की गुणवत्ता को नई ऊंचाई देगा। प्रशिक्षित चिकित्सक सड़क दुर्घटनाओं, कार्डियक अरेस्ट, हार्ट अटैक जैसी परिस्थितियों में जान बचाने में सक्षम होंगे।”
इसके साथ ही उन्नत कार्डियक केस सिमुलेशन, डिफिब्रिलेटर तकनीक, मेडकिट प्रबंधन और टीम बेस्ड रिस्पॉन्स पर व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षकों ने केस आधारित चर्चा और वीडियो डेमो भी प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर कार्यशाला के आयोजक व एनेस्थीसिया विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं न केवल चिकित्सा शिक्षा को सुदृढ़ करती हैं, बल्कि समाज को सुरक्षित और जागरूक बनाती हैं। प्रशिक्षित डॉक्टरों की संख्या जितनी बढ़ेगी, आकस्मिक मृत्यु दर उतनी ही घटेगी। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य हर युवा डॉक्टर को जीवनरक्षक तकनीकों में दक्ष बनाना है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में वह सही निर्णय ले सके।
इस अवसर पर संस्थान के वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ. भूपेंद्र कश्यप, डॉ. संगीता जोगी, डॉ. जे.पी. स्वाइन, डॉ. प्रशांत निगम ने इस प्रशिक्षण के महत्व से प्रशिक्षु डॉक्टरो को अवगत कराया।
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