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चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने नाकाम, सरकार ने मीडिया पर प्रतिबंध लगाने जारी किया फरमान, जमकर हो रही फजीहत

बिलासपुर। जिला अस्पताल की क्लास वन डॉक्टर ने एक महिला का निजी अस्पताल में ऐसा नसबन्दी ऑपरेशन किया कि उसकी आंत ही काट डाली, जान सांसत में पड़ गई 7 लाख का खर्चा आया। एक बड़े हॉस्पिटल में इस पैर के बजाय मरीज के उस पैर का ऑपरेशन दिया गया। कोरोना कॉल में न दवाई का पता था न इलाज का फिर भी 10-10 लाख का बिल वसूल कर लिया गया । अपोलो में फर्जी हार्ट स्पेशिलिट ने कई को गलत ऑपरेशन कर मार डाला, ऐसे 1 नही अनेक उदाहरण है पर किसी भी मामले में कोई कार्रवाई नही की गई। इलाज के नाम पर पूरे अंचल के लोग खून के आंसू रो रहे और छत्तीसगढ़ सरकार है कि आम जनमानस को न्याय प्रदान करने के बजाय मेडिकल कॉलेज और सरकारी अस्पतालो में रोगियों की गोपनीयता, सुरक्षा और शांति का हवाला दे मीडिया पर ही प्रतिबंध लगाने हॉस्पिटल प्रशासन को मीडिया के लिए प्रोटोकॉल निर्धारित करने फरमान जारी कर रहा।

नवा रायपुर, अटल नगर से 13 जून को समस्त अधिष्ठाता, शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय और संयुक्त संचालक एवं अस्पताल अधीक्षक शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय को इस आशय का एक फरमान जारी किया गया है। जारी फरमान के तहत सभी सरकारी मेडिकल कालेजों और सरकारी अस्पतालों में रोगियों की गोपनीयता, सुरक्षा और शांति का हवाला दे मीडिया को समय पर जानकारी मुहैया कराने मीडिया प्रबंधन के लिए प्रोटोकॉल निर्धारित करने कहा गया है। जारी फरमान में अस्पतालों में जनसम्पर्क अधिकारी नियुक्त कर उनके ही माध्यम से मीडिया को जानकारी मुहैया कराने, अस्पताल के अधिकारी एवं कर्मचारियों को मीडिया से सीधे सम्पर्क करने से रोकने की बात कही गई है।

लेनी होगी अनुमति

जारी फरमान में मीडिया को मरीज और अस्पताल के अंदर की फोटो या वीडियो लेने की अनुमति न देने, और इसके लिए रोगी या उसके कानूनी अभिभावक से लिखित सहमति के बाद ही मीडिया को जानकारी प्रदान करने कहा गया है।


कब जनता की सुध लेगी सरकार

सवाल यह उठ रहा कि क्या नए मंत्री से स्वास्थ्य महकमा नही सम्भल रहा, आखिर मीडिया पर प्रतिबंध क्यो? क्या इसी दिन के लिए जनता ने उन पर विश्वास किया है।
ये तो मीडिया का दबाव है कि सरकारी अस्पतालों से लामा और मरीजो को पैसे के लिए निजी अस्पताल ले जाकर उनका ऑपरेशन करने की घटनाओं में पहले से कमी आई है। यदि मीडिया की नजर न हो तो व्यवस्था और गर्त में चली जायेगी सरकार को ये समझना चाहिए। और मीडिया पर इस तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और प्रभावी बनाने प्रयास करना चाहिए ताकि जनता सरकार की वाहवाही करे।

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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