
बिलासपुर। ज्वाली नाला तोड़फोड़ कांड में निगम प्रशासन ने अंतिम नोटिस के बाद यहाँ फिर रिहर्सल शुरू कर दी है। चर्चित काम्प्लेक्स को लेकर नए-नए खुलासे हो रहे, तनाव बढ़ रहा तो नेतागिरी भी हावी है। दरअसल निगम आयुक्त की यहाँ चहलकदमी के बाद शनिवार को फिर निगम के जोन कमिश्नर उपयंत्री, पटवारी और अमले के साथ कार्रवाई के लिए चिन्हांकित तीर के निशान का जायजा लेने पहुँचे।

दो से ग्यारह मीटर सरकारी जमीन

बताया जा रहा कि नाले के दोनो ओर 3-3 मीटर सरकारी जमीन है, इसके बाद कही 2.75 मीटर तो कही 11 मीटर तक सरकारी जमीन है,

दो नही चार आवासीय नक्शे पर तना है चर्चित व्यवसायिक काम्पलेक्स




निरीक्षण के दौरान ये भी पता चला कि ये चर्चित काम्प्लेक्स 2 आवासीय नक्शे पर नही बल्कि 4 आवासीय नक्शे पर तना है। यहां नाले की 3 मीटर के बाद 11 मीटर सरकारी जगह है, यानि सरकारी जमीन पर सीढी और अन्य निर्माण करा लिया गया है। इस काम्प्लेक्स के दुकाओ का शटर नाले की तरफ लगा है, जबकि नक्शे में इसके निस्तार के लिए पीछे गली में सड़क दिखाया गया है। इसके अलावा यहां एक मंजिल अतिरिक्त निर्माण होना, 14 फ़ीट की गली में 50 फुट का काम्प्लेक्स खड़ा कर दिया गया, 4 अलग अलग नाम से आवासीय भवन की अनुज्ञा दी गई है, 4 रो भाइयों ने आवासीय के बजाय चारो को जोड़कर एक बड़ा व्यवसायिक काम्प्लेक्स बना लिया गया है। भवन अनुज्ञा की अवधि मार्च 2022-23 में खत्म हो चुकी है। तय मापदंड के बजाय जगह नही छोड़ी गई है, पूरे परिसर में निर्माण कर लिया गया है।
हो रही फजीहत, आ रहे कॉल
नजूल और राजस्व अमले की नापजोख के बाद कार्रवाई के लिए चिन्हांकन किया गया, जिसके निशान आज तक दिखाई दे रहे है। अफसर या निगम का अमला जब भी यहाँ चहलकदमी करता है, नेताओ के फोन के खड़कने शुरू हो जा रहे, निगम प्रशासन की साख दांव पर है मैसेज गलत जा रहा, चर्चा आम है कि मेयर और उनके पति के हड़काने के बाद कार्रवाई रुकी है, यहां निर्माण में खामियां जगजाहिर है, ऐसे में सवाल उठ रहे कि निगम प्रशासन का जोर क्या सिर्फ समारू – पहारू पर है, क्या उन्ही की झोपड़ियां बस गलत थी जिन पर बुलडोजर चलवा ढिया गया।
न एक्ट के हिसाब से न चुनाव आयोग के राडार पर
शासन के नियम के मुताबिक अफसरों को उनके गृह जिले पर पोस्टिंग नही दी जाती, लेकिन बिलासपुर नगर निगम के ज्यादातर अफसर न सिर्फ स्थानीय है बल्कि अपनी पूरी सर्विस या बीच मे झोल बना यही डेरा डाले है। न नियम से इनका तबादला हुआ न कभी ये अफसर चुनाव आयोग के राडार पर आए।
बेबी को वेज पसन्द है
पुरा माजरा बेबी को वेज पसन्द है टाइप है। राज्य गठन के बाद इन पिछले 25 सालों में 2000 से सन 2003 तक कॉंग्रेस सत्ता में रही, 2003 से 2008 तक, 2008 से 2013, और 2013 से 2018 तक प्रदेश में भाजपा की सत्ता रही, इसके बाद 2018 से 2023 तक कांग्रेस और 2023 से 2028 तक फिर भाजपा सत्तासीन हुई, दोनो दल की सरकारों में ये ही अफसर रहे जिनकी देखरेख में शासन की तमाम योजनाओं का बण्ठाढार हुआ करोड़ो रूपये की बर्बादी हुई योजनाएं खण्डहर में तब्दील हो गई लेकिन फिर भी ये ही अफसर दोनो सरकार की पसन्द रहे और बने बैठे तो कुछ रिटायर हो गए। बिलासपुर में विकास के नाम पर खोदो पाटो अभियान के यही सूत्रधार है, फिर भी पसन्द तो पसन्द है।
डिस्कवरी ऑफ अवैध निर्माण
जिला प्रशासन के आदेश पर निगम प्रशासन ने पिछले दिनों एक सर्कुलर जारी कर निगम राजस्व, पुलिस और सम्बन्धित विभाग के अफसरों को अमले के साथ सप्ताह में एक दिन अपने अपने काहेट्रो मे भृमण कर अतिक्रमण, अवैध निर्माण और अवैध प्लाटिंग रोकने समेत अन्य जिम्मेदारियां दी गई थी, पर इस पर अमल ही नही हुआ, प्रशासन अपने अमले के बजाय मीडिया में आ रही अवैध प्लाटिंग, अतिक्रमण और अवैध निर्माण पर कार्रवाई करना शुरू कर माहौल बनाये तो न सिर्फ अच्छा सन्देश जाएगा, बल्कि लोगो के मन मे प्रशासन के खिलाफ पक्षपात पूर्ण कार्रवाई को लेकर उठ रही आवाज और फजीहत से निजात भी मिल सकेगी।
बनवाने वाले दोषी, जिम्मेदार निर्दोष
इस तरह का ये पहला मामला नही है, इसके पहले भी तेलीपारा में दो आवासीय नक्शे की भवन अनुज्ञा पर 36 डबल डेकर व्यवसायिक कम्पलेक्ड के निर्माण का मामला सामने आ चुका हैं, सवाल यह उठ रहा कि तब निगम के अफसरो को ये गलत निर्माण क्यो दिखाई नही देते, बाद में नोटिज और तोड़फोड़ का खेल क्यो,खेला जाता है। क्या उच्चाधिकारियों को ये खेल समझ मे नही आ रहा, और यदि आ ध तो फिर शहर भर में अवैध निर्माण और अवैध प्लाटिंग के लिए जिम्मेदार अफसर को अभयदान क्यो, आखिर बिलासपुर नगर निगम के अफसर किसकी सह और इशारे पर वैध अवैध का ये गन्दा खेल खेल रहे। आखिर जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई क्यो नही की जाती।
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