

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मेडिकल माफियाओं की हिम्मत तो देखिए मीडिया प्रबंधन के नाम पर सरकारी मेडिकल कॉलेज और उनसे संबद्ध अस्पतालों में मीडिया पर पर बैन लगाने की चाल चल दी। हालांकि पत्रकारों की नाराजगी के बाद सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा।
सबको पता है कि मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल सहित सरकारी अस्पतालों की क्या दशा है। कैसे सरकारी अस्पतालों से मरीजो को दलालों के मार्फ़त निजी अस्पतालों में बुलवाकरनीलाज के नाम पर लूट मची है, एक दिन में चिकित्सा के नाम पर हजारों की बिलिंग चल रही है, कैसे सरकारी अस्पताल के कुछ डॉक्टर मरीजो को निजी अस्पताल ले जाकर उनका ऑपरेशन कर मरीज की जान को सांसत में डाल रहे। पिछले दिनों जरहाभाठा शासकीय जमुना प्रसाद वर्मा कालेज के बगल के एसकेबी हॉस्पिटल में जिला अस्पताल की 1 क्लास वन डॉक्टर ने नसबन्दी के दौरान उसकी आंत को काटकर कैसे उसकी जान को जोखिम में डाल दिया।


सरकार का एक ही फ़ंडा है कि यदि डॉक्टर पर कार्रवाई करेंगे तो चिकित्सा कौन करेगा। बताया जा रहा कि सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कालेजों के लिए मेडिकल माफिया ने वृहद प्लान तैयार करने के बाद सरकार पर सरकारी मेडिकल कॉलेज और उनसे संबद्ध अस्पतालों में मीडिया के प्रतिबंध का पासा फेका, इस आशय का आदेश जारी होने के बाद जब आक्रोशित पत्रकारों ने जब आदेश की प्रतिया जलाकर प्रतीकात्मक विरोध जताया तेवर दिखाए सरकार को आनन- फानन में प्रोटोकॉल आदेश को निलंबित करना पड़ा। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को एक वीडियो जारी कर कहना पड़ा कि मीडिया का सम्मान सर्वोपरि है। जो आदेश जारी किया गया, वह व्यापक विचार-विमर्श के बिना जारी किया गया। मैं व्यक्तिगत रूप से इस आदेश को तत्काल प्रभाव से निलंबित करता हूं।
इस घटना ने मीडिया माफिया और सरकारी तंत्र के गठजोड़ की कलई खोलकर रख दी, सरकार की जमकर फजीहत हुई सो अलग।
ये पब्लिक है
पब्लिक भी समझ गई है कि चल क्या रहा, उन्हें पता है कि सरकारी अस्पतालों में जो थोड़ी बहुत इलाज और दवाइयां मिल जा रही वो केवल मीडिया के कारण है, मीडिया को सरकारी अस्पतालों पर बैन करने के बाद क्या होगा ये भी उन्हें पता है, क्योकि एक नही ऐसे कई उदाहरण सामने आ चुके है।



