
0 फर्जीवाड़ा कर उसकी सम्पत्ति बेचने वाले मार रहे मज़ा

0 किसी को बुजुर्ग असहाय महिला पर नही आई दया

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में जो न हो कम है, सक्ती जिले के डभरा तहसील के ग्राम-ढ़नगन की 70 वर्षीया सजीला बाई अपनी ही पुश्तैनी जमीन पर अधिकार पाने के लिए 10 साल से प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काटते-काटते इस कदर हताश निराश होकर राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर स्वैच्छिक इच्छा मृत्यु की विधिक अनुमति प्रदान मांग रही ताकि रोज-रोज अपमानित और पीड़ित होकर जीने के बजाय वह शांतिपूर्वक इस जीवन से विदा ले सके। वही फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसकी जमीन को अवैध रूप से बेचने वाले मजा मार रहे, जो सिस्टम के मुह पर एक बड़ा तमाचा है।


महामहिम राज्यपाल महोदय, छत्तीसगढ़ शासन को भेजे गये पत्र्त और कलेक्टर के नाम सौपे गए ज्ञापन में सजीला बाई ने कहा कि वह विगत कई वर्षों से सक्ती जिले के ग्राम-ढ़नगन के प.ह.न. 23 तहसील व थाना डभरा, के अपनी ही पुश्तैनी जमीन पर अधिकार पाने के लिए अफ़सरोबके चक्कर काट रही है। उसने थाना-डभरा में लिखित आवेदन भी दिया पर उसकी रिपोर्ट तक नही लिखी गई।

उसने बताया कि गाव में उसकी खसरा नं. 980/1 में 0. 324 हेक्ट. पैतृक भूमि, जो जिसे बगैर उसकी जानकारी और सहमति के कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर गत 31 मार्च 2015 को अवैध रूप से रजिस्ट्री कर दी। जबकि इस जमीन का स्वामित्व उसके नाम पर है। उसने तहसील, थाना, रजिस्ट्री कार्यालय, कलेक्टर कार्यालय से लेकर पुलिस थाने तक शिकायतें कीं, कई बार प्रमाण और दस्तावेज प्रस्तुत किए, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिन अधिकारियों का दायित्व मुझे न्याय दिलाना था, उन्होंने फाइलों में मेरा मामला दबाकर केवल आश्वासन ही दिया, जिससे अब उसका इस सिस्टम से धैर्य और विश्वास उठ गया, और लगने लगा है कि इस लोकतंत्र में एक गरीब, बुजुर्ग महिला की आवाज की कोई कीमत नहीं है। न मेरी जमीन मुझे मिली, न न्याय, न ही सम्मान और तो और और 7 साल पहले सन 2018-19 में उसने डभरा तहसील न्यायालय में बंटवारे के लिये जो आवेदन दिया था उस पर भी आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई।
आवेदन के साथ वृद्धा ने . थाने व तहसील को पूर्व में दी गई शिकायत की प्रतिलिपियाँजमीन के मूल दस्तावेज, ऋण पुस्तिका खसरा एवं बी-1 और फर्जी रजिस्ट्री की प्रति भी संलग्न कर क्रूरतापूर्वक आग्रह किया है कि यदि उसे उसकी पुस्तैनी जमीन वापस नही दिलाई जा सकती और दोषियों पर कार्रवाई सम्भव नहीं है तो उसे इकचछामृत्यु की अनुमति दी जाए ताकि वह अपनी इहलीला समाप्त कर कम से कम सम्मानपूर्वक मर सके।
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