
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर मेडिकल कालेज में फर्जी EWS प्रमाण पत्र के जरिये होनहार विद्यार्थियों का हक मारकर एमबीबीएस की सीट हथियाने के खेल ने न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था को बड़ी चुनौती दी है बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़ा कर दिया है…..


सिम्स में तीन छात्राओं द्वारा फर्जी EWS प्रमाण पत्र के आधार पर नीट परीक्षा पास की और MBBS में दाखिला भी पा लिया। बिलासपुर के चर्चित तहसील कार्यालय में तस्दीक करने पर पर पता चला कि इन नामो से कोई प्रमाण पत्र जारी ही नहीं किया गया है। यानी तय हो गया कि प्रस्तुत दस्तावेज़ फर्जी है, ये मामला सिर्फ मेडिकल सीट की चोरी नहीं है बल्कि ईमानदार बच्चों के सपनों की हत्या जैसा है।
सिम्स के अधीक्षक डॉ. लखन सिंह का कहना है कि जिनका फर्जी सर्टिफिकेट पकड़ा गया है, उनका एडमिशन कैंसिल होगा और कानूनी कार्रवाई भी होगी। सवाल ये है कि क्या फर्जी डाक्टरी के इस खेल में सिर्फ तीन छात्राएं ही गुनहगार हैं क्या सिस्टम में बैठे लोगों की कोई जिम्मेदारी नही है।

डॉ लखन सिँह
(अधीक्षक, सिम्स अस्पताल)…….
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