
बिलासपुर। चावल चोर सिंडिकेट की करतूतों को रोक पाने में जिले का खाद्य महकमा असहाय है, विभाग के पास इसके लिए कोई अमला, कोई सिस्टम ही नही है, ये विभाग मीडिया पर ही निर्भर है तभी तो मीडिया में खबरे आने के बाद विभाग के अफसरों को पता चलता है, इसके बाद भी कार्रवाई नही प्रतिवेदन का खेल चलता है।
हाल ही में सीपत में भाजपा नेता का भाई गाड़ी में चावल लोड करा परिवहन करते पकड़ा गया। बिलासपुर में भी राशन दुकान संचालक द्वारा एक सरकारी भवन से चावल की बरामदगी पुलिस ने की, मांडवाली का दौर चला।

इसके बाद भी सशक्तिकरण की चिंता
जिले में लगातार पकड़ी जा रही चोरी के चावल के अलावा, पीडीएस दुकान संचालको द्वारा बाजार से खरीदकर चावल के बदले कार्डधारियों को गेहूं, शक्कर दिए जा रहे, इसके अलावा मसाले के पैकेट खरीदने जबरिया दबाव डाला जा रहा इसकी भी कोई सुनवाई नही। सवाल यह उठता है कि राशन दुकान है कि किराना दुकान जब सरकार नही दे रही तो वे गेंहू, शक्कर, मसाले जबरिया बेच कैसे सकते है, खाद्य नियंत्रक इसे गलत नही मानते उनका कहना है कि आर्थिक सशक्तिकरण के लिए मासाले और चिल्हर न होने पर बेच सकते है इसमें कोई गलत नही है।
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