
बिलासपुर। सरकारी उपक्रमो के निजीकरण के दावे की सच्चाई उजागर होने के बाद भी सरकारें आउट सोर्सिंग की पक्षधर है…? नतीजतन व्यवस्थाएं बिगड़ रही है, विद्युत मंडल से विद्युत वितरण कम्पनी तक के सफर का इससे अच्छा उदाहरण और क्या हो सकता है। उस समय की बिजलीं की स्थिति और अब की स्थिति में जमीन आसमान का अंतर है, जिसकी दोहरी मार से पूरा छत्तीसगढ़ कराह रहा। बिजलीं व्यवस्था की चरमराहट से पूरा प्रदेश वाकिफ है, घोटालों- पर घोटाले हो रहे है, अफसरों को बचाने आम उपभोक्ताओं पर सरपट भागने वाला स्मार्ट मीटर थोपा जा रहा, टैरिफ में बढ़ोतरी की जा रही, कांग्रेस सरकार के हाफ बिजलीं बिल हाफ योजना को डिलीट कर दिया गया, जनता आंदोलित होकर राहत मांगने आंदोलन कर रही, स्मार्ट मीटर को माला पहनाकर पूजा करके सरकार को नाराजगी के संकेत दे रही, राहत मांग रही… पर सरकार है कि पब्लिक को जीरो बिजलीं बिल और सब्सिडी की झप्पी दे कर्जे की बोरी लाद रही है…!

पब्लिक परेशान है कि जनता के लिए जनता द्बारा चुनी गई सरकार आखिर उनकी नाराजगी और उनकी आवाज को अनसुनी क्यो कर रही है।

कम्पनी है तो फंड क्यो

शासन ने तत्कालीन विद्युत मंडल को विद्युत वितरण कम्पनी, डिस्ट्रीब्यूशन समेत 4 कम्पनियों में विभक्त कर दिया है, इसके बाद भी सरकार ने विद्युत व्यवस्था में सुधार के लिए करोड़ो रूपये दे रही, हाल ही में विद्युत व्यवस्था में सुधार के लिए दिए गए करीब डेढ़ सौ करोड़ का घोटाला कर दिया गया। सवाल यह उठ रहा है कि जब कम्पनी है तो सरकार इसके लिए फंड क्यो दे रही है।
क्या है पीएम सूर्यघर योजना
कहा जा रहा कि पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना है, जिसके तहत पब्लिक को घरों में सौर पैनल लगाने के सब्सिडी देकर सस्ती बिजली प्रदान करने का दावा है कि इससे हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलेगी,
ये है योजना का मजमून
इस योजना के तहत, 1 किलोवाट के लिए ₹30,000, 2 किलोवाट के लिए ₹60,000 और 3 किलोवाट या उससे अधिक के लिए ₹78,000 तक की सब्सिडी देने की योजना है।
इसके लिए आवेदक राष्ट्रीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
3 किलोवॉट डिमांड ज्यादा बताई जा रही है, जिसकी लागत 1 लाख 95 हजार रुपये है, इज़के लिए 78 हजार रुपये केंद्र और 30 हजार रुपये राज्य सरकार की सब्सिडी है, यानि 1 लाख 95 हजार के 3 किलोवाट वाली स्कीम के लिए कुल सब्सिडी 1 लाख 8 हजार है, शेष 87 हजार रुपये की EMI किश्तों में देना पड़ेगा। बैंक से लोन दिलाने का काम योजना के वेंडरों द्वारा कराए जाएगी।
ये है हालात
बिलासपुर विद्युत रीजन के 4 जिलों बिलासपुर, मुंगेली, पेंड्रा और कोरबा में 2027 तक 1 लाख पीएम सूर्यघर योजना के कनेक्शन का टारगेट दिया गया है, इसके लिए अभी तक महज 5969 आवेदकों ने पंजीयन कराया है, इन 4 जिलों में अभी तक कनेक्शन की संख्या हजार तक नही पहुच सकी है, अभी तक केवल 930 कनेक्शन लग चुके है।
इसलिए पड़ रही जरूरत*
दरअसल कोयले के घटते भंडारण और इससे उत्पादित बिजलीं की दर ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते सरकार अब पारम्परिक ऊर्जा के बजाय सोलर एनर्जी पर जोर दे रही है।
8 लाख 30 हजार उपभोक्ता
बिलासपुर (रीजन) विद्युत क्षेत्र के इन 4 जिलों में टोटल 8 लाख 30 हजार विद्युत उपभोक्ता है, जिनमे से 6 लाख 82869 घरेलू और 1 लाख 47 हजार 131 कृषि पम्प, औधोगिक और कमर्शियल कनेक्शनधारी है जिन्हें पारम्परिक से सौर ऊर्जा करने की प्लानिंग है।
रात को भी बिजलीं चाहिए तो देना होगा डबल चार्ज
पीएम सूर्यघर की ये स्कीम सूर्यनारायण की ताप पर निर्भर है, बद्दल बारिश और रात में पारम्परिक बिजलीं ही लेनी पड़ेगी यानि मीटर भागेगा यदि इन व्याधियों के बाद भी बिजलीं चाहिए तो यहाँ भी हाइब्रिड स्किम है, लेकिन चार्ज डबल होगा इसमें बड़े बैट्रा लगवाना होगा जो पॉवर सेवर का काम करेगी और विपरीत परिस्थितियों में भी विद्युत सप्लाई जारी रहेगी।
आलोक अम्बष्ट, कार्यपालक निदेशक(ईडी) बिलासपुर विद्युत क्षेत्र, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कम्पनी
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