0 जमीन के दस्तावेज लेकर रिटायर्ड अफसर काट रहे कलेक्टर एसपी के चक्कर

0 रजिस्ट्री और राजस्व विभाग के बीच तालमेल न होने स


बिलासपुर। लगता है कागज पाथर की कोई अहमियत ही नही रह गई है। तभी तो सकरी में निगम के रिटायर्ड राजस्व अफसर विनोद शर्मा की जमीन को भूमाफियाओं ने बिना उनकी जानकारी के बेच डाला।
सवाल यह उठ रहा कि जब राजस्व रिकार्ड में जमीन उनके नाम पर नामांतरित हो गई है, उनका कब्जा है तो उनकी जानकारी के बगैर ये हो कैसे गया। उन्होंने इसकी शिकायत दर्ज कराई है।
राजस्व अधिकारी श्री शर्मा ने बताया कि उन्होंने सन 2007 में सकरी जैन इंटरनेशनल स्कूल के पीछे खसरा नंबर 804/01 की 23 डिसमिल भूमि को श्रीमती श्यामा पाण्डेय से खरीदा था।


उन्होंने क्रय की गई इस भूमि का नामांतरण कराया और कब्जा भी प्राप्त कर लिया। उन्हें इस फर्जीवाड़े का पता तब चला जब उन्होंने इसी माह 6 अक्टूबर 2024 को भूईया एप के माध्यम से अपनी जमीन की स्थिति जानने नकल निकलवाया वह यह देखकर चौंक गए कि भूमाफियाओं ने उनकी जमीन बेच डाला रिकार्ड में अब यह जमीन उनके नही बल्कि खरीददार रामसाय राम के नाम पर दर्ज है। जबकि विनोद शर्मा ने अपनी जमीन कभी भी किसी को बेची ही नहीं है और न ही किसी के साथ कोई सौदा किया। इस फर्जीवाड़े की गंभीरता तब और बढ़ गई जब तहसीलदार ने उक्त जमीन के नामांतरण के लिए आदेश जारी कर दिया। यह दिखाता है कि मामले में न सिर्फ रजिस्ट्री फर्जी तरीके से की गई, बल्कि नामांतरण की प्रक्रिया को भी प्रभावित किया गया। यह एक गंभीर प्रशासनिक चूक है, जिससे सरकारी रिकॉर्ड की सत्यता और वैधता पर सवाल उठते हैं। विनोद शर्मा ने कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंप पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जिले के राजस्व विभाग में इस तरह का ये कोई पहला मामला नही है ऐसे कई प्रकरण है जो सरकारी तंत्र और भूमि रिकॉर्ड प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। पीड़ित शोषित लोग जमीन और अपने जीवन भर की गाढ़ी कमाई गवा दर दर भटक रहे कोई सुनने वाला नही उनके हाथ मे जमीन के कागजात तो है पर राजस्व विभाग के रिकार्ड से उनका नाम गायब हो दूसरे के नाम पर चढ़ गया।
हाल ही में सीजीडीएनए ने सरकंडा जबड़ापारा का एक मामला भी सामने लाया था जिसमे उसके मकान की जमीन रिकार्ड में पड़ोसी के नाम चढ़ गई। मामा ससुर के सम्पर्क के एक आरआई से पहचान और भेंट चढ़ावे से काम बना और मकान मालिक को तत्काल अपना मकान बेचकर एमपी भागना पड़ा।
वही निगम के ही एक ही एक रिटायर्ड इंजीनियर एसके दनौरिया के प्रकरण का भी खबर में जिक्र किया गया जो अपने मंगला स्थित प्लाट का रकबा 2080 स्क्वेयर फ़ीट से बढ़कर रिकार्ड में 2180 वर्गफुट होने से हलाकान है और रिकार्ड को दुरुस्त कराने अफसरों के चक्कर काट रहे है।
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