
बिलासपुर । मल्टीनेशन कम्पनियां नेत्ररोग विशेषज्ञों का पेट मार रही है, ये हम नही चश्मा दुकानों के साइन बोर्ड और शहर की सड़कों पर दौड़ रहे ऑटो रिक्शा के पीछे लगे फ्लैक्स कह रहे है।

पिछले कुछ सालों से एक ट्रेंड चल रहा कि डॉक्टर की महंगी फीस प्रिस्किप्शन पर्ची के बाद उबाऊ प्रोसेस के बजाय सीधा चश्मा दुकान आइए कम्प्यूटर से अपनी आंख चेक कराइये मात्र 100 रुपये में और तत्काल चश्मा ले जाइए, मल्टीनेशन कम्पनियों के ये गेम सीधे उच्चस्तर से तय हुआ इसलिए इसमें किसी के हाथ डालने का सवाल ही नही उठता, इसके देखा देखी में लोकल ऑप्टिकल्स संचालको ने भी चश्मे का कारोबार शुरू कर दिया।

यही वजह है कि अब लोग डॉक्टरो के पास कम सीधे चश्मा दुकानों पर डायरेक्ट आंखों को कम्प्यूटर से चेक करा चश्मा बनवा पहन रहे है।
पहले ऐसे होती थी आंखों की जांच
पहले नेत्ररोग विशेषज्ञ नेत्र दोष से पीड़ित मरीजो को अल्फाबेट और छोटे बड़े अक्षर को बोर्ड पर पढ़वाते थे, फिर टॉर्च मारकर आखों की जांच कर मरीज की आंखों पर दवाई डलवा पुतली के डायल्यूट होने तक आधे से पौन घण्टे तक बिठाने के बाद फिर आंखों की जांच कर चश्मे का नम्बर देते थे, जिसकी जगह अब कम्यूटर डॉक्टर बाबू ने ले ली।
इस मसले को लेकर सीजीडीएनए की टीम ने सीएमएचओ शुभा गढेवाल से चर्चा की और उनसे जानना चाहा कि क्या ये सही है, और यदि सही है तो फिर डॉक्टरो की जरूरत क्यो,,, सुनिए वे क्या कह रहे है…।
और मेडिकल स्टोर्स में हो रहा शुगर
इतना ही नही शुगर टेस्ट भी अब मेडिकल स्टोर्स में हो रहे है, किट से चेक कर लोगो को उनके शरीर मे शुगर का लेबल बताने की भी सुविधा है।



