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“डंगनिया में देवी भागवत कथा की धूम, कथा व्यास पंडित महावीर शर्मा ने बताया नरक नहीं डर, राहु नहीं दंड—भक्ति ही मोक्ष का मार्ग”

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बिलासपुर। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम डंगनिया में चल रहे श्रीमद देवी भागवत कथा के सप्तम दिवस कथा व्यास पंडित महाबीर शर्मा ने रविवार को राहू मंडल, नरक के वर्णन, सरस्वती पूजन विधि, श्री राधाकृष्ण के रसरूप में द्रवित होने और तुलसी उत्तपत्ति की कथा का रसपान कराया।

कथावाचक पंडित श्री शर्मा ने समुद्र मंथन की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे अमृत की आशा में देवताओं के बीच वेश बदलकर बैठे दांनव स्वरभानु को सूर्य और चंद्र ने पहचान लिया और जैसे ही अमृत उसके कंठ से लगा क्षण भर में भगवान विष्णु ने सुदर्शन चला उसके शीश को धड़ से अलग कर दिया, लेकिन अमृत अमरता दे चुका था।
वही कटा हुआ सिर बना राहु।देह नहीं, पर चेतना प्रबल।
आकाश में उसका एक अदृश्य मंडल बना—जहाँ से वह सूर्य-चंद्र को ग्रसता है,और मनुष्य के जीवन में माया, भ्रम और अचानक परिवर्तन लाता है। राहु दंड नहीं देता,
वह परीक्षा लेता है।

वही नरक का वर्णन करते हुए पंडित श्री शर्मा ने बताया कि
नरक डरने की नहीं—समझने की बात है, उन्होंने बताया कि नरक, यमराज का क्रोध नहीं,उनका न्यायालय है।जब आत्मा शरीर त्यागती है,तब चित्रगुप्त उसके कर्मों की पुस्तक खोलते हैं।जिसने अन्याय किया है, वह तमिस्र में अंधकार भोगता है, और जिन्होंने दुसरो को सताया हिंसा की वह रौरव नरक को भोगता है। आत्मा की शुद्धि के बाद वह फिर से कर्मभूमि में जन्म लेता है। कथा व्यास पंडित श्री शर्मा ने ज्ञान की देवी माँ सरस्वती के प्राकट्य की कथा बताते हुए कहा कि

भगवान ब्रह्मा जी ने सृष्टि रची परं उसमें न ज्ञान था, न स्वर तब माँ सरस्वती वीणा की झंकार के साथ प्रकट हुईं। जिससेअज्ञान काँप उठा“ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” का मंत्र गूंजने लगा। इसके साथ ही उन्होंने राधा-कृष्ण के रस में द्रवित होने और माता तुलसी के उत्पत्ति के त्याग और भक्ति की कथा बताई कि कैसे वृंदा नाम की पतिव्रता स्त्री ने अपने तप के बल से भगवान श्री विष्णु से अपने पति जालंधर के प्राणों की रक्षा की।कैसे भगवान श्री नारायण उनकी भक्ति देख द्रवित हो उठे और माता वृंदा को वर दिया कि “तुम तुलसी बनोगी, आज भी हर द्वार पर तुलसी मौन में कहती हुई खड़ी है कि
भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती।

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