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उगते सूर्य को अर्ध्य देकर छठव्रतियों ने की सुख समृद्धि की कामना, डॉ दीक्षित निवास में भी हुआ आयोजन

बिलासपुर। छठ महापर्व के चौथे दिन भगवान भाष्कर की पूजा अर्चना और उदयाचल सूर्यनारायण भगवान को अर्घ्य देकर छठव्रतियों ने 36 घण्टे के कठिन व्रत का जलधारण कर पारण किया।

इसके साथ ही 4 दिन के छठ महापर्व का समापन हो गया।
एशिया के सबसे बड़े लगभग 7 एकड़ में फैले बिलासपुर के तोरवा छठघाट में छठव्रतियों ने शुक्रवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया।इस दौरान बड़ी संख्या में छठव्रती मौजूद रहे मेले सा माहौल रहा।


वही सरकंडा सीपत रोड स्थित नगर निगम के रिटायर्ड डॉ अशोक दीक्षित ने अपनी पत्नी भाई वरिष्ठ पत्रकार संजय दीक्षित पुत्र व पुत्र वधुओ और परिजनों स्नेहीजनों के साथ घर के छत पर बनाये गए तालाब में खड़े होकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर सुख, समृद्धि की कामना की।

इसके साथ ही प्रकृति और सूर्य उपासना के 4 दिवसीय छठमहापर्व का समापन हो गया।

प्रसाद का वितरण

छठ पूजा में प्रसाद का विशेष महत्व होता है। ठेकुआ, फल, नारियल, और अन्य प्रसाद, जिन्हें तीसरे दिन शाम को संध्या अर्घ्य में भी अर्पित किया गया था, चौथे दिन भी उगते सूर्य के अर्घ्य में भगवान भास्कर को अर्पित किये गए। इसके बाद छठव्रतियों ने जल ग्रहण कर 36 घण्टे के निर्जल व्रत का पारण कर भोग प्रसाद का वितरण किया।

चौथे दिन का आध्यात्मिक महत्व

छठ पूजा का चौथा दिन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का पर्व भी है। उगते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने का तात्पर्य जीवन में नई शुरुआत, ऊर्जा, और सकारात्मकता का स्वागत करना है। सूर्य देवता और छठी मैया की उपासना से जीवन में संतुलन और समृद्धि प्राप्त होती है, और इस पूजा से समाज में सामुदायिक भावना को भी बल मिलता है।

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