

0 लगाया जमीन विवाद को दबाने चंदे का रंग देने आरोप, पुलिस पर भी लगाया

0 कहा मारपीट में घायल हम हुए उल्टे हमारे खिलाफ करा दी FIR
0 पुलिस पर भी लगाया मिलीभगत का आरोप कहा हमारी नही लिखी गई
बिलासपुर। अब तेलीपारा कथित चंदा कांड में दूसरे पक्ष की एंट्री हो गई। असल जर जमीन विवाद का बताया जा रहा। आस्था गणेशोत्सव समिति के अध्यक्ष शुभम सोनी और कार्यकारी अध्यक्ष आशु अग्निहोत्री ने कैट और छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से लगाए गए जबरिया चंदा वसूली और मारपीट के आरोपों को खारिज करते हुए सोमवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा की और पुलिस प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया कि उनकी शिकायत तक दर्ज नही की जबकि डिजिटल साक्ष्य है…!समिति ने पदाधिकारियों से कहा कि पूरे विवाद की मूल वजह चंदा नहीं, बल्कि जमीन, पेड़ काटने और रास्ते को लेकर चल रहा विवाद है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन विवाद को दबाने और समिति की छवि खराब करने के लिए मामले को जबरिया चंदा वसूली का रूप दिया गया।
समिति पदाधिकारियों ने बताया कि गत 11 सितंबर को जमीन पर लगा पुराना पेड़ काट दिया गया था। इसकी जानकारी मिलने के बाद 17 सितंबर को वे लोग संबंधित व्यापारी से बातचीत करने उनके दुकान गए थे। उनका कहना है कि पेड़ उनके पिता के समय से लगा था। इसी मुद्दे पर बातचीत के दौरान गाली-गलौज और हाथापाई हुई। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि मारपीट में उनके हाथ, गले और छाती में चोट आई, लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय उनके खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी।
रसीद से भृम फैलाने आरोप
समिति ने चंदे के आरोपों पर रसीद का हवाला देते हुए कहा कि विवादित रसीद गणेशोत्सव समिति की नहीं, बल्कि दुर्गा समिति की थी। गणेशोत्सव के लिए उसी दिन विवाद से करीब घण्टे भर पहले वे उनके संस्थान से 5500 रुपये की सहयोग राशि(चंदा)ले चुके थे।
समिति की छवि धूमिल करने प्रयास
पदाधिकारियों ने कहा कि जमीन विवाद को चंदे के विवाद में बदलकर आम नागरिकों के बीच गणेशोत्सव समिति की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शहर की धार्मिक समितियां सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से वर्षों में अपनी प्रतिष्ठा बनाती हैं। ऐसे में किसी जमीन विवाद को चंदे से जोड़ना उचित नहीं है।
वो अपने काम का शूट कराये, सार्वजनिक करें ऑडियो – वीडियो
समिति ने विवाद के संबंध में दुकान का पूरा सीसीटीवी फुटेज सामने रखने की मांग की है। पदाधिकारियों का कहना है कि सामने आया फुटेज अधूरा है। उन्होंने घटनाक्रम की पूरी रिकॉर्डिंग के साथ ऑडियो भी सार्वजनिक करने की मांग की, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विवाद किस मुद्दे पर हुआ था। उनका कहना है कि पूरी रिकॉर्डिंग सामने आने से जमीन विवाद और चंदे के आरोपों के बीच वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
क्या मैं सक्षम नही
समिति के पदाधिकारी स्पोर्ट में जमीन मालकिन को लेकर प्रेसवार्ता में पहुचे, मीडिया के सवाल में सीनियर सिटीजन महिला ने कहा क्या मैं सक्षम नही दिखती, उन्होंने कहा कि
सारा दांव जमीन का है, उन्होंने बताया कि विवादित भूमि में उनका हिस्सा है और प्लाटिंग से पहले नाले के लिए जमीन का हिस्सा शासन को दिया गया था, जिस पर रास्ता बना बाकी जमीन को प्लॉटिंग कर बेचने प्रशासनिक और धरातली सड़क बनवाने सारी कवायद की जा रही।
समिति ने पूरे मामले की पुलिस और राजस्व स्तर पर निष्पक्ष जांच कराने और धार्मिक आयोजन को चंदे के धंधे से जोड़कर समिति को बदनाम करने वालो से माफी मंगवाकर धार्मिक भावना को आहत होने से बचाने की मांग की है।
नही तो करेंगे उग्र आंदोलन
समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि हम सच्चाई जाहिर करने मीडिया के समक्ष आये है, ताकि आपके माध्यम से हकीकत जन-जन तक पहुचे और चंदे के नाम पर किये गए बदनाम करने की साज़िश का भंडाफोड़ हो सके। इसके बाद भी यदि शासन- प्रशासन ने उनके निवेदन पर उचित कदम नही उठाया और जांच करा दोषियो पर कार्रवाई करने फल नही की तो वे उग्र आंदोलन करने बाध्य होंगे।
और किये कई भण्डाफोड़
प्रेस वार्ता के दौरान समिति के पदाधिकारियों ने दरबार लॉज के पीछे व्यवसायी द्वारा शेड और पक्का अवैध निर्माण कराने और सालो से कई बार शिकायत के बाद भी घने रिहायशी इलाके में पुलिस व प्रशासन की सह पर पटाखे के अवैध कारोबार से जनमानस को होने वाले खतरे का आरोप लगाया



