
0 पर ट्रेक्टर रेत की कीमत पहुँची 3 हजार से 3600 तक

01हाइवा रेत हो गया 18- 20 से 30- 33 हजार पहुंच गया
0 अरपा हुई रेत विहीन, शिवरीनारायण और दीगर जिलों आ रही रेत की खेप
बिलासपुर/ छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा हर साल की तरह इस बरस भी बारिश पूर्व 15 जून से 15 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश के रेतघाटों को बंद करने के ऐलान के बाद रेत के दाम प्रति ट्रैक्टर 2000- 2200 से 3000- 3600 और प्रति हाइवा 18- 20 हजार से बढ़कर 30 से 33 हजार तक पहुंच गई।
अंधाधुंध रेत चोरी के कारण सफेद रेत और साफ जल की धार वाली अन्तः सलिला अरपा मैय्या से रेत गायब और अरपा मैले गड्ढे में तब्दील हो गई, वो भी तब जब छत्तीसगढ़ में सत्ता शासन करने वाले सरकारों ने अरपा को स्वच्छ और सुंदर बनाने सियासत की बड़े- बड़े दावे किए,
हालात ये है कि अब शहर के बीचों- बीच बहने वाली अंतः सलिला अरपा में न तो रेत है न स्वच्छ जल, मृतकर्म आदि संस्कारो के लिए नदी तट पर टैंकर बुलवाना पड़ता है, तो भवन निर्माण के लिए शिवरीनारायण और दीगर जिलों से रेत मंगाना पड़ रहा।
जिले में एक लाइसेंसी, दर्जनों अवैध डंपर कारोबारी
जिले में कोटा में केवल एक रेत कारोबारी ने रेत डंप करने का लाइसेंस ले रखा है पर शहर में एक भी लाइसेंसी डंपर नही है, बावजूद इसके शहर के तोरवा दर्रीघाट के बीच, तोरवा धान मंडी बायपास रोड, तोरवा छठघाट पुल से तोरवा चौक, बिलासपुर- रतनपुर रोड, मंगला और आसपास के इलाके, लिंगियाडीह पुल – आपोलो रोड, लिंगियाडीह- वेयर हाउस रोड- हजरत बिलाल चौक तक जगह जगह सड़क किनारे अवैध रूप से रेत डंप कर अनाप – शनाप रेत पर बेचा जा रहा।
जानकारों का कहना है कि बारिश के मद्देनजर अवैध रूप से रेत कारोबार करने वाले कारोबारी अभी खुले प्लाटों पर अंधाधुंध रेत डंप करा रहे, एक बारिश का इंतजार है इज़के बाद रेत के दाम और बढ़ जाएंगे।
घर बनाना हुआ महंगा और होगा
कोरोना काल मे सब्जियों के दाम तय करने और किसानों के उपज का दर तय करने वाले
शासन- प्रशासन का रेत के कीमतों पर कोई नियंत्रण ही नही है, नतीजतन अनाप- शनाप दाम पर रेत बेची जा रही, हताश, परेशान और बेबस लोग महंगे दर पर अपना घर बनाने रेत खरीदने विवश है।
तब है ये हाल
ये हाल तब है जब सरकार ने 15 अक्टूबर तक रेत घाटों को बंद करने का ऐलान कर दिया, और खनिजों के अवैध उत्खनन व परिवहन पर पेनाल्टी बढाकर ट्रैक्टर की पेनल्टी 25 हजार और हाइवा की रेत की मात्रा के आधार पर जुर्माने की दर में इजाफा कर दिया है।
आखिर कहां है रेत बनाने का कारखाना
प्रदेश भर के रेट घाटों को बन्द करने के सरकारी ऐलान और पेनाल्टी में वृद्धि करने के बावजूद आखिर रेत किस कारखाने से आ रही ये समझ से परे है।
एडेसिव बना बड़ा विकल्प, फिर भी रेत की दरकार
पिछले कुछ सालों से बिल्डिंग मटेरियल की सप्लाई करने वाली कंपनियों ने एडिसिव लांच कर रखा है, जो रेत के बड़े विकल्प के रूप में सामने आया है, लोग भवन निर्माण कार्य के लिए अब महंगे रेत और सीमेंट के बजाय अब एडिसिव का इस्तेमाल कर करा रहे है।
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शहर में किसी ने भी डंपिंग लाइसेंस नही लिया है, केवल एक लाइसेंसी कोटा में है, शासन ने 15 अक्टूबर तक सभी रेत घाटों को बन्द करने ऐलान कर दिया है, पेनाल्टी भी बढ़ा दी है, चूंकि रेत दीगर जिलों से आ रहा इसलिए रेत के दाम पर प्रशासन का नियंत्रण नही है।
के के गोलघाटे, उपसंचालक खनिज बिलासपुर
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