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प्रेमी और उसका साथी निकलां छात्रा पर एसिड अटैक का आरोपी, पुलिस ने कोंडागांव से किया गिरफ्तार…

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0 प्रेमिका का किसी और से हंस के बात करना नागवार गुजरा
0 इसी टसल में दोस्त के साथ घटना को दिया अंजाम

बिलासपुर/बालोद-/ ये कैसा प्रेम बालोद के आमापारा क्षेत्र में पुलिस कर्मी की बेटी 22 वर्षीय छात्रा पर एसिड अटैक करने वाला कोई और नही उसका प्रेमी निकलां। पुलिस ने युवती के कथित प्रेमी व उसके दोस्त को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियो में छात्रा का प्रेमी यश सोनकर और उसका दोस्त करण कुंजाम बताए जा रहे पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेजे जाने की कार्रवाई की गई।

और फिर पुलिस ने कराया आरोपियो का मुंडन

पुलिस के अनुसार, छात्रा का प्रेमी यश को अपनी प्रेमिका का अन्य पुरुष मित्रों से बातचीत करना गवारा नही था, इसी के चलते उसने अपने भैरमगढ़ के दोस्त कुंजाम को इसकें लिए तैयार किया फिर दोनों ने छात्रा पर एसिड अटैक के वारदात को अंजाम दिया। पूछताछ में यह बात भी सामने आई कि आरोपी इस वारदात को गणेश विसर्जन झांकी के दौरान अंजाम देना चाहते थे, पर उस दिन प्लानिग गड़बड़ा गया।
पुलिस के मुताबिक, सोमवार को आरोपी करण कुंजाम ने कथित योजना के तहत छात्रा पर एसिड फेंका और मौके से फरार हो गया। घटना के बाद पुलिस ने पूछताछ के दौरान छात्रा के प्रेमी यश सोनकर से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ीं और साजिश का खुलासा किया।

कोंडागांव में छिपे थे आरोपी

वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियो ने अपना ठिकाना बदल दिया और कोंडागांव आ गए, पुलिस ने पूछताछ में मिले इनपुट और साक्ष्य के बाद फरार आरोपी करण कुंजाम को कोंडागांव से धरदबोचा।

आक्रोश और निंदा

इस घटना के बाद से बालोद नगर में आक्रोश का माहौल था, नगरवासियों ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की । खबर है कि स्थानीय अधिवक्ताओं ने एकजुटता दिखाते नए आरोपियो का केस न लेने का संकल्प लिया।

ये है कानूनी प्रावधान और सजा

धारा 124 (तेजाब से गंभीर चोट पहुँचाना): यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर तेजाब या किसी अन्य संक्षारक (जलाने वाले) पदार्थ का उपयोग करके चोट पहुँचाता है या विकृति पैदा करता है, तो कम से कम 10 वर्ष की कैद से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और पीड़ित के चिकित्सा खर्च के लिए उचित जुर्माने का प्रावधान है।

एसिड फेंकने का प्रयासः

यदि कोई व्यक्ति तेजाब फेंकने का प्रयास भी करता है, तो उसे 5 से 7 साल तक की कैद और जुर्माने से दंडित किया जाता है।

पीड़ितों के अधिकार और चिकित्सा सहायता

मुफ्त इलाजः देश के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों का यह कानूनी दायित्व है कि वे एसिड अटैक पीड़ित को तुरंत और मुफ्त में प्राथमिक उपचार व चिकित्सा देखभाल दें। ऐसा न करने पर अस्पताल के जिम्मेदार व्यक्ति को 1 साल तक की सजा हो सकती है।

मुआवजा और पुनर्वासः

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, केवल सजा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि न्याय में पीड़ित को पर्याप्त मुआवजा और पुनर्वास दिलाना भी शामिल है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत अब उन पीड़ितों को भी मुआवजा और सरकारी सहायता दी जाती है जिन्हें जबरन एसिड पिलाया गया हो या अंदरूनी गंभीर चोटें आई हों।

एसिड की बिक्री पर नियम

सुप्रीम कोर्ट ने एसिड की खुली बिक्री पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। एसिड केवल लाइसेंस प्राप्त दुकानों पर ही बिक सकता है, और खरीदार की पहचान (ID Proof) दर्ज करने के बाद ही बिक्री का रजिस्टर mantener (रखा) जाता है। नाबालिगों को एसिड बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

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