

बिलासपुर / सर्पदंश फर्जी मुआवजा कांड को 21 गिरफ्तारी के बाद न सिर्फ सांप सूंघ गया, बल्कि जमानत और ट्रांसफर का गर्द उड़ने लगा ये संकेत है कि साढ़े 17 करोड़ के गड़बड़झाले पर ग्रीननेट चढ़ा दिया गया।
एक के बाद एक नायब तहसीलदारों, अतिरिक्त तहसीलदारों और फिर तहसीलदारों को इधर से उधर कर खांचा बिठा दिया गया। चर्चा इस बात की है कि इतने बड़े कांड के उजागर होने के बाद भी क्या तहसील के कोई अफसर जिम्मेदार नही है क्योंकि ऑर्डर पर साइन तो उन्ही के है, उन्हें उसी समय क्यो नही हटाया गया जैसे तमाम बातों को लेकर चर्चा आम है, क्योंकि मामला सरकारी खजाने को साढ़े 17 करोड़ की चपत लगाने के फर्जीवाड़े और खुले खेल का है।


इक्चाधारियो की पूरी हुई इक्छा
साँपो को बेवजह बदनाम कर गवर्नमेंट को फर्जीवाड़ा कर साढे सत्रह करोड़ की चपत लगाने को लेकर मचे घमासान के बाद से अफसर अपनी सीट से हटने जोड़तोड़ और एप्रोच लगाने राजधानी की दौड़ लगा रहे थे, आखिरकार उनकी इक्छा पूरी हो गई और वे जहा जाना चाहते वहां कुर्सी पा गए।
ये भी है चर्चा
खबर है कि इस फर्जीवाड़े कांड से जमानत पर छूटे बाबू को उसी कुर्सी पर बिठा दिया गया जहां वे पहले कार्यरत थे, सवाल यह उठ रहा कि क्या ये उचित है… क्या इससे दस्तावेज के इधर उधर गड़बड़ाने और साक्ष्य प्रभावित होने का कोई खतरा नही।



