0 स्मार्ट सिटी के कार्यो में गफलत के आरोप पर केंद्रीय राज्य मंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री कर चुके जांच का दावा
0 सवाल जीरो टॉरलेन्स का है,



बिलासपुर। 77 लाख के चर्चित एफडीआर कांड ने एक बार फिर स्मार्ट सिटी लिमिटेड में अफसरों और ठेकेदारो के बीच चल रहे जुगलबंदी की पोल खोलकर रख दी। अफसरों को जरा भी खौफ नही है कुछ भी बयान देकर मामले को दबाने और चर्चित ठेकेदार को बचाने भरसक कोशिश कर रहे। सवाल यह उठ रहा कि क्या एफडीआर भी भला कभी एक्सपायर्ड होता है।
बिलासपुर वासियों से पूछे तो एक लाइन में कह देंगे कि बिलासपुर में स्मार्ट सिटी के दफ्तर को छोड़ कुछ भी स्मार्ट नही है। जर्जर गड्ढेदार सड़को के बजाय प्रशासन सड़क किनारे दीवारों को रंगबिरंगा और सड़कों के बीच डिवाइडर की मरम्मत और रंगने में लगे है सौंदर्यीकरण के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा।



ये है मामला
ये मामला 2021 का बताया जा रहा। महाराणा प्रताप चौक के पास नाला निर्माण का कार्य टेंडर प्रक्रिया के बाद चयनित ठेकेदार को दिया गया। 77 लाख रुपये का एफडीआर जमा कराने पर वर्कआर्डर जारी किया गया। आरोप है कि ठेकेदार ने काम छोड़ दिया और अफसरों व स्टाफ से सांठगांठ कर एफडीआर हासिल कर उसके बदले कलर फोटोकापी जमा करा बैंक से एफडीआर की रकम का आहरण कर लिया। तय प्रावधान के तहत एफडीआर अमानत राशि है जो काम पूर्ण होते तक जमा रहता है और काम पूर्ण होने पर ही वापस किया जाता है। ये सीधे -सीधे एफडीआर चोरी और धोखाधड़ी का मामला है जिसे महज 16 लाख का जुर्माना ठोककर निबटने का प्रयास किया गया। फिर जब फजीहत हुई तब यह कहकर ठेकेदार को बचाने प्रयास किया जा रहा कि एफडीआर चोरी नही हुआ बल्कि एक्सपायर्ड हो गया था ठेकेदार ने इसीलिए उसके बदले नया एफडीआर जमा कराया। सवाल यह उठ रहा तो फिर ठेकेदार पर 16 लाख का जुर्माना और बैंक व आरबीआई को चिट्ठी क्यो।
जलवा कांग्रेस नेता का
सत्ता भले भाजपा की है पर जलवा तो कांग्रेस समर्थित छात्र नेता का रहा। उसकी मांडवाली के बाद अफसर टस से मस नही हुए। मामला तब बिगड़ा जब इस मामले में विधायक और भाजपा से जुड़े दो छात्र नेताओं की एंट्री हुई। बताया जा रहा कि विधायक अफसर से मिलने दफ्तर तक पहुँच गए। उन्होंने अफसर से चर्चित ठेकेदार को 10 करोड़ का बड़ा ठेका दिलाने और चर्चा में आये एफडीआर कांड को सुलटाने पासा फेका बस यही से मामला और गड़बड़ा गया।
स्टेट और सेंट्रल मिनिस्टर तक दे चुके जांच का आश्वासन
स्मार्ट सिटी के कार्यो को लेकर लगातार उठ रहे सवालों को लेकर मीडिया ने उपमख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू से सवाल किया दोनों ने जांच का आश्वासन भी दिया पर हुआ कुछ नही अब आगे क्या होगा इसको लेकर लोगो मे कौतूहल है क्योंकि दावा जीरो टॉरलेन्स का है।
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