ब्रेकिंग

अपने को तो चैंबर से मतलब, घोषित जोन क्रमांक 3 टाउन हॉल में अधिकारियों – कर्मचारियों के बैठने की जगह नही पदाधिकारियों ने बनाया ठीहा नंबर 2


0 एक चैंबर मेयर तो दूसरा सभापति का, कई- कई दिन नही खुलता
0 एक कमरे को कब्जे से बचने टांगना पड़ा निगम आयुक्त का बोर्ड
0 काम -काज पर पड़ रहा असर, बैठने की जगह नही इसलिए बड़े हॉल में लगाकर बैठे है टेबल

बिलासपुर। नई नगर सरकार के पदाधिकारी अभी तक गाड़ी बंगला और चैंबर के लिए जूझ रहे। इतना ही नही पदाधिकारियों ने तो जोन क्रमांक 3 के कार्यालय के लिए घोषित टाउन हॉल में भी अपना दूसरा चैंबर बनवा बकायदा बोर्ड भी टांग दिया। भई सरकार है अफसर – कर्मचारी तो कुछ बोल नही सकते विवश है। मीडिया वालो के कान फूक रहे कि का करन भैया बैठे के जगहेच नई है। कइसे काम करन।
आप खुद ही देख लीजिए ये नगर निगम का मुख्यालय टाऊन हॉल है। अब अंदर की इन तस्वीरों को देखिए कैसे जगह के अभाव में कोई अंदर कोंटे में टेबल लगाए बैठे है तो कोई हाल में।

ऊपर भी ऐसा ही नजारा है। जहाँ सामान्य सभा के दौरान सभापति और अफसर बैठते है, उस चबूतरे में टूटे फर्नीचर का कबाड़ पड़ा है,

ठीक बगल के कमरे के बाहर आयुक्त का बोर्ड लगा है, ताकि कोई इस पर कब्जा न कर ले पर अंदर सुशासन की पेटी और कबाड़ पड़ा है।

क्योकि निगम के एमआईसी सदस्यों ने भी अब जनता के कामकाज का हवाला दे चैंबर की मांग रख दी है।

वहीं एक चैंबर में मेयर तो दूसरे में जहाँ निगम आयुक्त और उसके बाद इंजीनियर का कार्यालय था वहाँ अब सभापति का बोर्ड टँगा है।

जबकि इन दोनों पदाधिकारियों को विकास भवन में चैंबर आबंटित कर दिया गया, न तो पूर्ववर्ती निगम सरकार ने इसका पालन किया और न ही वर्तमान ने। जबकि बकायदा टाऊन हॉल को राघवेंद्र राव सभा भवन के बाद जोन कार्यालय घोषित कर दिया गया है।
और सवाल इसलिए भी की जोन कार्यालय में अव्यवस्था के बीच काम करने वाले अफसर आखिर काम किसके लिए कर रहे हैं, उन्ही के लिए और शहर के नागिरिको के लिए ही न।
अब देखना होगा कि जनता के चुने प्रतिनिधि क्या पहल करते है, क्योकि सवाल जनता के प्रभावित होने वाले काम का है।

तै तो आ गे हम कहां जाई बता

दरअसल गुरुवार दोपहर एक नागरिक अटल आवास में कब्जे की शिकायत लेकर एक कर्मचारी के पास पहुँचा, और उसने मकान को कब्जा मुक्त कराने कहा, कर्मचारी ने कहा तै तो शिकायत लेके इहा आ गए अब हम कहा जई बता हमरो तो ये हाल है, बैठे तक के जगह नई है।

Author Profile

शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
Latest entries