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प्रधान आरक्षक के जमीन फर्जीवाड़ा कांड में आईजी की तल्खी का दिखा असर, च्वाइस सेंटर के फर्जीवाड़े का भी खुल गया भेद, फर्जी आधार बनाने के मामले में संचालक भी गिरफ्तार

0 अब तक 6 धराये, और कितने बाकी उठ रहे सवाल

0 रजिस्ट्री के लिए दस्तावेज ओके करने वाले राजस्व अमले पर भी उठ रही उंगलियां

बिलासपुर । आईजी की तल्खी के बाद हरकत में आई सरकण्डा पुलिस को प्रधान आरक्षक की पुश्तैनी जमीन को फर्जी दस्तावेज के आधार पर बेच रजिस्ट्री कराने के मामले में सरकंडा पुलिस ने बुधवार को कुड़ूदंड के एक च्वाइस सेंटर संचालक को भो गिरफ्तार किया है । आरोप है कि इसी ने फर्जी जमीन विक्रेता का फर्जी आधार कार्ड बनाया था । पुलिस अब तक आधा दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। कुछ और आरोपियो की धरपकड़ करने कवायद की जा रही है ।
मामला सिम्स चौकी में पदस्थ प्रधान आरक्षक प्रकाश दुबे की खमतराई के करीब 70 डिसमिल पुस्तैनी जमीन को कूट रचित दस्तावेज और कुदुदंड के च्वाइस सेंटर में बनाये व बनवाये गए फर्जी आधार तैयार कर बेचने का है।


उनको कब पकड़ेगी पुलिस


चर्चा है कि जमीन के इस गोरख धंधे में ,राजस्व विभाग के अफसर, कर्मचारी, बिल्डर और उसके दलाल भी शामिल है, जिन्होंने माहिराना ढंग से कूट रचित दस्तावेज और फर्जी आधारकार्ड तैयार कराया। जाहिर है खेल बड़ा और खिलाड़ी और भी है, अब ये बात अलग हैं कि कानून का राडार कहा तक चल पाएगा।


निजीकरण का दुष्परिणाम


शासन ने आमजनमानस की सुविधा के लिए शहर से लेकर गाँव-गाँव तक च्वाइस सेंटर की फेसिलिटी दी है, पर इसके दुष्परिणाम भी सामने आ रहे, इस मामले में बनाकर ढिया गया फर्जी आधार कार्ड इसका बड़ा उदाहरण है, इसी कमजोरी के चलते प्रदेश में बांग्लादेशी रोहिंग्या लोगों की जांच पड़ताल कराई जा रही, ये तो फर्जी आधार कार्ड बनाने और बनवाने का एक मामला है न जाने ऐसे और कितने फर्जी आधार कार्ड बनाए और बनवाएं है इसकी भी जांच जरूरी है। सवाल यह उठ रहा कि जब प्रशासन के पास इस तरह के फर्जीवाड़े को रोकने का कोई इंतजाम नही है तो ये च्वाइस सेंटर की अनुमति निजी हाथों में दे कैसे दी गई। क्या इसे रोकने कोई इंतेजाम नही।

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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