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शहर से लेकर गावो तक गूंजी हलषष्ठी माता की जयजयकार, माताओं- बहनों ने सन्तानो की सुख समृद्वि के लिए किया पूजन…



बिलासपुर,,, छत्तीसगढ़ का प्रमुख हलषष्ठी पर्व शहर समेत अंचलभर में श्रद्धा के साथ मनाया गया! शहर की सड़कों और गलियों में तालाब का प्रतीक बनाकर माताओं एवं बहनों ने व्रत रखकर माता हलषष्ठी का पूजन किया!


    भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को संतान के सुख, दीर्घायु और खुशहाली की कामना के साथ माताओं बहनों ने व्रत रखा!
इस व्रत को  ‘हर छठ‘ के नाम से भी जाना जाता है! मान्यता है! कि आज के ही दिन भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलरामजी का जन्मोत्सव है! ऐसे में हल षष्ठी पर व्रत रखने और पूजा करने का खास महत्व होता है! यह व्रत संतान सुख की प्राप्ति, दीर्घायु, बेहतर स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए रखा जाता है!


  सरकण्डा सीपतरोड पर चिंगराजपारा मोड़ पर नवनिर्मित नर्मदेश्वर मंदिर के सामने मोहल्लेभर की व्रती माताएं बहने पूजन की थाल सजाकर गड्ढा खोदकर बनाये गए तालाब के किनारे काशी गड़ाकर पूजन के लिए पहुची और चुकिया कुल्हड़ में लाई, महुआ और मिलवा का प्रसाद अर्पित कर पूजन कर माता हलषष्ठी व्रत की कथा सुनने के बाद महाआरती की!
      पूजन के बाद माताओं और बहनों ने बच्चों के पीठ पर पोता मारकर उन्हें भोग प्रसाद का वितरण कर, पसहर चावल के भात मुनगा व छह प्रकार की भाजी का भोग लगा भैस के दही व घी के साथ भोग प्रसाद का सेवन कर व्रत का पारण किया।

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Santosh Shriwas
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