
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में चावल चोरों के आगे सिस्टम ही फेल हो गया, तभी तो पॉस मशीन और कार्डधारकों के फिंगर प्रिंट के बाद भी आये दिन सरकारी राशन दुकान संचालको के द्वारा बाजार में बेचने ले जाये जा रहे सरकारी सरकारी अनाज गाड़ियों समेत पकड़े जा रहे, ये तो वो है जो पकड़ा रहे कितने बिक जा रहे इसका तो कोई ओर छोर नही। सीपत में सरकारी चावल की अफ़रा- तफरी के मामले में पकड़े गए भाजपा नेता के भाई को तो थाने से छोड़ दिया गया, अब कागजी खेल चल रहा अब एसडीएम द्वारा उन्हें नोटिस देने की खबरे आ रही, और जब वो भाग जाएगा तब फरारी की खबरे आएगी जाहिर है कि बिना मिली भगत के ये खेला तो चल नही रहा सबका धेला तय है…
इसके पहले मध्यंनगरी के एक राशन दुकान से चावल के अफ़रा तफरी की खबरे भी आई, अब सीपत से भी भाजपा नेता के भाई भी इसी आरोप में पकड़ा गया, सवाल यह उठ रहा कि जब चावल की अफ़रा- तफरी रोकने केवाईसी हो गया, पॉस मशीन लगे है कार्डधारकों के फिंगर प्रिंट लिए जा रहे तो फिर गाड़ी- गाड़ी चावल बाज़ार में बिकने कैसे जा रही।


पुलिस और खाद्य महकमे के अफसर कब तक इनोसेंट बनकर ये सब चलने देंगे, क्या उन्हें नही पता कि सरकारी चावल के चोरी की खेप जा कहा रही।

शनिचरी में है बड़े संकलन केंद्र

यदि पुलिस और खाद्य विभाग को पता नही तो हम बता दे रहे, ये दो नम्बर के चावल के खेप की गाडियां शनिचरी में बिलासा चौक के पास के दुकानों में, शनिचरी के पुराने स्लाटर हाउस के पीछे और चाँटीडीह- चिंगराजपारा स्कूल रोड वाली गली के एक गोदाम में खुलेआम खरीदी जा रही।
कहा नही बिक रहा सरकारी चावल
राशन दुकानों में संचालक सरकारी चावल के बदले नकद पैसा या शक्कर या गेंहू दे रहे है, गली मोहल्लों के दुकानों में लोग बेच रहे या बेचकर बदले में खाने लॉयक चावल बाजार से खरीद ले रहे।
ये है सरकारी चावल के खरीददार
खुद राशन दुकान संचालक 22-23 रुपये में खरीद रहे, इसके अलावा शनिचरी के दुकानों में, किराना दुकानों में ये चावल बिक रहे 22-23 रुपये में, यहां से ये चावल इडली डोसा वाले, होटल वाले 30 रुपये में खरीदकर ले जा रहे, अफसर, कारोबारी सब खाओ गगन रहो मगन कह रहे…
वही बड़े पैमाने पर सरकारी चावल खरीदने वाले कारोबारी इस चावल को गाड़ियों में भरकर पोहा मिल या छिलाई पॉलिस मिल भेज रहे क्योकि छीलकर पतला करने के बाद यही सरकारी चावल चकाचक 70-80 रुपये किलो में बाजार में बिक रहे है।
लाखो करोड़ो नही अरबो का खेल कर खुशी बगरा रहे माफिया
सस्ता चाउर सब्बो सेती… खुशी बगर के चारो केती… कुल मिलाकर सरकारी चावल का ऐसा ही खेल चल रहा,,, लंबे समय से ये चर्चा है कि कुछ राशन दुकान संचालको ने अपने परिचितों – परिजनों और पड़ोसियों तक के नाम पर बोगस राशन कार्ड बनवा रखे है, सारा खेल इसी का है।
तो क्या मॉनिटरिंग की व्यवस्था तक नही है
सवाल यह उठ रहा कि क्या प्रशासन के पास सरकारी चावल की अफ़रा- तफरी करने वाले इन माफियाओं को रोककर शासन को लग रहे अरबो- खरबो की चपत को रोकने कोई सिस्टम नही है,,,? या फिर वे भी माफिया सिस्टम का हिस्सा बन गए है, क्योकि चर्चा तो यही है कि अफसरों की मिलीभगत के बिना ऐसा सम्भव ही नही है…
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