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गणपति परिक्रमा से नही होगा सड़को पर पसरे मवेशियों का प्रबंधन, हाईकोर्ट रोड ही नही सिटी में भी करनी होगी कार्रवाई, तभी नियंत्रित होंगे हादसे

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बिलासपुर। निगम प्रशासन के ठेके की चरमराई प्रकाश व्यवस्था और सड़कों पर पसरे मवेशी शहरवासियों के लिए बारिश में बड़ा संकट बन गए है। हाईकोर्ट की नाराजगी और कलेक्टर के निर्देश के बाद निगम अमले को शहर की सड़कों पसरे मवेशियों को पकड़ने के बजाए फिर हाईकोर रोड और शहर के वीआईपी इलाके में लगा दिया गया। अब क्षेत्र को कैटल फ्री जोन मांन बैठे अफसर इन तस्वीरों को भी देख ले…

दिक्कत ये है कि मवेशियों के उचित प्रबन्धन को लेकर शासन- प्रशासन के पास कोई ठोस योजना ही नही है, नतीजतन हाईकोर्ट रॉड से पकड़कर लाये गए मवेशियों को खेप खेप में कभी शहर के बाहर तो कभी हाइवे रॉड और गावो में छोड़ा जा रहा या फिर गोठान से ही इन्हें डंडा मारकर भगा दिया जा रहा, यही वजह है कि राजकिशोर नगर, मोपका, सीपत रोड पर जगह जगह सड़को पर मवेशियों के डेरा है।

उससे भी चिंताजनक बात ये है कि शासन- प्रशासन के पास सड़को पर पसरे इन मवेशियों के उचित प्रबन्धन की कोई व्यवस्था नही है।ठेके के श्रमिक यानि शहर के बेरोजगार और अप्रशिक्षित युवको मवेशी पकड़ने जैसे जान जोखिम के काम मे लगाया गया है, जो अपने परिवार का पेट पालने अपनी जान को जोखिम में डाल इन मवेशियों की धरपकड़ कर रहे।

70 का खर्चा 20 ही पटका


पिछले दिनों हाईकोर्ट रोड पर ही मवेशी पकड़ने के दौरान एक ठेका कर्मी की एक्सीडेंट में जान- जाते जाते बची, घायल ठेका श्रमिक को इलाज और ऑपरेशन की पीड़ा झेलनी पड़ी, उसके भरोसे पल रहे उसके माता पिता को अपने कमाऊ पूत के इलाज के लिए कर्ज लेकर निजी अस्पताल का 70 हजार का बिल चुकाना पडा।
मीडिया में खबरे आने पर हड़बड़ाए अफसर के कहने पर ठेकेदार ने फजीहत से बचने 20 हजार की मदद राशि दी शेष 50 हजार का इंतजाम उन्हें खुद करना पड़ा।

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